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Zojila टनल के आखिरी 2.5 मीटर हिस्से में धमाका, पूरा होने की दिशा में एक बड़ा कदम

 जम्मू: कश्मीर घाटी को लद्दाख से जोड़ने वाली रणनीतिक महत्व की ज़ोजिला टनल मंगलवार को पूरी होने के अंतिम चरण में पहुँच गई है। अधिकारियों ने बताया कि हिमालय की ऊँचाई पर स्थित इस हाई-एल्टीट्यूड इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के आखिरी 2.5 मीटर हिस्से को ब्लास्ट करके तोड़ा गया, जिससे टनल के दोनों सिरे आपस में जुड़ गए। यह टनल दुनिया की सबसे लंबी सिंगल-ट्यूब बाई-डायरेक्शनल बाईपास टनल के रूप में जानी जाती है।

इसके बनने के बाद जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के बीच यात्रा समय में बड़ी कटौती होगी। वर्तमान में ज़ोजिला के माध्यम से यात्रा करने में लगभग 1.5 घंटे का समय लगता है, लेकिन टनल के पूरा होने के बाद यह समय घटकर केवल 15 मिनट रह जाएगा। ट्रांसपोर्टेशन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि इस टनल का निर्माण कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और भारी हिमपात वाले क्षेत्रों में किया गया है।

रियोजना की ऊँचाई और हिमालयी परिस्थितियों को देखते हुए इसे भारत की सबसे चुनौतीपूर्ण टनल परियोजनाओं में गिना जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, टनल के दोनों सिरे जुड़ने से सड़क और ट्रैफिक के लिए भी सुगम मार्ग बन जाएगा। ज़ोजिला टनल की लंबाई लगभग 14 किलोमीटर है और इसे बनाकर कश्मीर और लद्दाख के बीच होने वाली सड़क यातायात में सुरक्षा, समय और सुविधा में सुधार किया गया है।

परियोजना से सेना और आपातकालीन सेवाओं के लिए भी मार्ग आसान होगा। इसके अलावा, यह टनल सर्दियों के मौसम में जाम और बर्फबारी के कारण बंद होने वाली ज़ोजिला पास की कठिनाइयों को भी कम करेगी। अधिकारियों ने बताया कि टनल के निर्माण में नवीनतम इंजीनियरिंग तकनीकों और सुरक्षा उपायों का उपयोग किया गया है। टनल को भूकंप-प्रतिरोधी बनाया गया है और इसमें रोशनी, वेंटिलेशन और इमरजेंसी एक्सिट जैसी आधुनिक सुविधाएं दी गई हैं।

इससे यात्री सुरक्षा और सुविधा दोनों बढ़ेंगी। स्थानीय प्रशासन और केंद्रीय परियोजना प्रबंधन टीम ने बताया कि टनल के पूर्ण संचालन की तैयारियां शुरू हो गई हैं। जल्द ही परीक्षण और सुरक्षा जांच पूरी होने के बाद इसे आम यातायात के लिए खोल दिया जाएगा। टनल के खुलने से क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों में भी सुधार होगा, क्योंकि यात्रा समय कम होने से व्यापार और माल ढुलाई अधिक आसान हो जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि ज़ोजिला टनल न केवल पर्यटन और वाणिज्यिक गतिविधियों को बढ़ावा देगा, बल्कि भारत की रणनीतिक और सैन्य तैयारी में भी अहम योगदान देगा। यह टनल जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के बीच कनेक्टिविटी को नई ऊँचाई पर ले जाएगी और क्षेत्रीय विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इस परियोजना को केंद्रीय और राज्य सरकारों के सहयोग से अंजाम दिया गया है और इसे भारत की हाई-एल्टीट्यूड इंजीनियरिंग की एक बड़ी सफलता माना जा रहा है।


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